भारत का भूगोल- 2. भारत का भोतिक स्वरुप

                                            2. भारत का भौतिक स्वरूप
देश के  कुल क्षेत्रफल के 10.7% भाग उच्च पर्वत श्रेणियां है, जिनकी ऊंचाई समुद्र तल से 2,135 मीटर या उससे अधिक है l  305 मीटर से 2,135 मीटर की ऊंचाई वाली पहाड़ियां 18.6% भू-भाग पर फैली र है l 43% भू-भाग पर विस्तृत मैदान का विस्तार है l
                         हिमालय का प्रादेशिक विभाजन
प्रादेशिक विभाग       लंबाई      विस्तार
पंजाब हिमालय      560 किमी. सिंधु एवं सतलज नदियों के  मध्य
कुमायूं हिमालय     320 किमी. सतलज एवं काली नदियों के मध्य
नेपाल हिमालय      800 किमी काली  एवं तीस्ता नदियों के मध्य
असम हिमालय      720 किमी एकता एवं दिहांग  नदियों के मध्य
भौतिक रचना तथा धरातल के स्वरूप के अनुसार भारत को पांच भागों में बांटा गया है-  1 उत्तरी पर्वतीय मैदान 2 विशाल मैदान, 3 प्रायद्वीपीय पठार 4 मरुस्थलीय प्रदेश व 5 समुद्रतटीय मैदान
भू वैज्ञानिकों के  मतानुसार जहां आज हिमालय पहाड़ है वहां टीथिस नामक  उथला समुद्र था l
हिमालय की उत्पत्ति के संबंध में आधुनिक सिद्धांत प्लेट विवर्तनिकी (Plate tectonics) है l
हिमालय की पर्वत श्रेणियां प्रायद्वीपीय पठार की और उत्तल एवं तिब्बत की और अवतल हो गई है l
उत्तर के पर्वतीय क्षेत्र को चार प्रमुख समांतर पर्वत श्रेणी क्षेत्रों में बांटा जा सकता है l
1. ट्रांस हिमालय क्षेत्र: इसके अंतर्गत काराकोरम लद्दाख जास्कर आदिपर्वत श्रेणियां आती है l  K-2 या गॉडविन ऑस्टिज (8,611 m ) काराकोरम की पर्वत चोटी है जो भारत की सबसे ऊंची चोटी है l
2.  हिमाद्रि अर्थात  सर्वोच्च या वृहद हिमालय: यह हिमालय की सबसे ऊंची श्रेणी है इसकी औसत  ऊंचाई 6,000 मीटर है जो विश्व की सबसे ऊंची चोटी एवरेस्ट नेपाल की पर्वत श्रेणी में स्थित है कंचनजंघा, नंगापर्वत, नंदादेवी,  कोमेट व नामचाबरवा आदि इसके कुछ महत्वपूर्ण शिखर है l
नोट: वृहद हिमालय लघु हिमालय के मेन सेंट्रल थ्रस्ट के द्वारा अलग होती है l
3.  हिमाचल श्रेणी अर्थात लघु या मध्य हिमालय:  इस श्रेणी में पीर पंजाल,, धौलाधर, मसूरी, नागटीबा एवं महाभारत श्रेणियां है l  वृहद व लघु हिमालय के मध्य कश्मीरी घाटी लाहुल स्फीति कुल्लू, कांगड़ा की घाटियां मिलती है l  यहां अल्पाइन चारागाह है, जिन्हें कश्मीर घाटी में मर्ग (गुलमर्ग, सोनमर्ग) तथा उत्तराखंड में वुग्याल  या पयार कहा जाता है शिमला, कुल्लू, मनाली, मंसूरी, दार्जिलिंग आदि लघु हिमालय में ही है l
 नोट:  लघु हिमालय शिवालिक में बाउंड्री फाल्ट (main boundry fault) के द्वारा अलग होती  हैं l
4.  शिवालिक अर्थात निम्न या  बाहरी हिमालय: यह हिमालय का नवीनतम भाग  हैं l शिवालिक एवं लघु हिमालय के बीच कई घाटियां हैं  जैसे काठमांडू घाटी पश्चिम इन्हें दून या द्वार कहते हैं  जैसे देहरादून और हरिद्वार शिवालिक के निचले भाग को तराई कहते हैं l
अरावली की पहाड़ियां राजस्थान राज्य में है यह सबसे पुरानी चट्टानों से बनी है  इस पहाड़ी की सबसे ऊंची चोटी माउंट आबू पर स्थित गुरु शिखर है इसकी ऊंचाई 1,722 मीटर है अरावली के पश्चिमी ओर से माही एवं लूनी नदी निकलती है लूनी नदी कच्छ के रण में गायब हो जाते हैं अरावली के पूर्व की ओर बनास नदी निकलती है l
नोट:  ऐसी नदी जो जमीन में ही लुप्त हो जाती है उसे The river of elphemeral कहते हैं l
मालवा का पठार मध्य प्रदेश एवं छत्तीसगढ़ राज्य में है l  यह ज्वालामुखी चट्टानों का बना हुआ है l इससे चंबल और बेतवा नदी निकलती है l
विंध्याचल का पठार झारखंड, उत्तर प्रदेश एवं छत्तीसगढ़ राज्य में है l  यह पर्वत दार चट्टानों का बना है l विंध्याचल पर्वतमाला उत्तर भारत को दक्षिण भारत से अलग करती है l
 मैकाल पठार छत्तीसगढ़ में है l  मैकाल पहाड़ी का सर्वोच्च शिखर अमरकंटक ( 1.036 मीटर) है l  यह पुरानी चट्टानों का बना एक ब्लॉक पर्वत है l इसके पश्चिम की ओर से नर्मदा नदी उत्तर की ओर से सोन नदी और दक्षिण की ओर से महानदी निकलती हैं l
छोटानागपुर स्थित रांची का पठार समप्राय मैदान का उदाहरण है l  छोटा नागपुर पठार को ‘भारत का रूर’ (खनिज भंडार की दृष्टि से यह भारत का सबसे संपन्न) भी कहा जाता है l
सतपुड़ा की पहाड़ियां मध्यप्रदेश राज्य में है l  यह ज्वालामुखी है चट्टानों से बनी हुई है इन की सबसे ऊंची चोटी   धूपघढ (1,350 मीटर) है l जो महादेव पर्वत पर स्थित है l इसके पूर्व हिस्से  से ताप्ती नदी निकलती है l
पश्चिमी घाट यह पर्वत ताप्ती नदी के मुहाने से लेकर कन्या कुमारी अंतरीप तक लगभग 1600 किमी. में विस्तृत है l  इसकी औसत ऊंचाई 1,200 मीटर है पश्चिमी घाट उत्तर में गुजरात के सौराष्ट्र प्रदेश में गिर की पहाड़ियां मिलती है जो एशियाई सिंह के लिए विख्यात है l  पश्चिमी घाट को सह्याद्री भी कहा जाता है l 16 डिग्री उत्तरी अक्षांश रेखा जो कि गोवा से गुजरती हैं l सहयाद्रि को दो भागों में विभाजित करती हैं -  उत्तरी सहयाद्रि एवं दक्षिणी सहयाद्रि l उत्तरी सहयाद्रि के ऊपरी सतह पर बेसाल्ट लावा का निक्षेप है वहीं दक्षिणी सहयाद्रि आर्कियन युग की ग्रेनाइट तथा नीस चट्टानों से बना है l   उत्तरी सहयाद्रि एवं दक्षिणी सह्याद्री की सर्वोच्च शिखर क्रमशः कॉलसुबाई (1,664 मीटर) एवं कुद्रेमुख (1,892 मीटर) है l महाबलेश्वर (1,438 मीटर) उत्तरी सहयाद्रि की दूसरी प्रमुख चोटी है l  महाबलेश्वर का उच्चतम बिंदु विल्सन प्लाइंट है l अर्थात सीड प्लाइंट, निडिलहॉल प्लाइंट (एलीफेंट प्लाइंट) महाबलेश्वर में ही है l महाबलेश्वर पर पांच नदियां कृष्णा, सावित्री, वैन्ना , गायत्री एवं कोयना निकलती है l
नोट : 1. मुंबई- नागपुर- कोलकाता रेल मार्ग एवं सड़क मार्ग थालघाट दर्रे से गुजरता है  
        2. मुंबई- पुणे- बेलगांव- चेन्नई रेल मार्ग एवं सड़क मार्ग  भोरघाट दर्रे से गुजरता है l
        3.कालीकट-त्रिचूर-कोयंबटूर इडॉर रेल मार्ग सड़क मार्ग पालघाट दर्रा गुजरता है l
                            
                              पश्चिमी घाट के दर्रे (उत्तर से दक्षिण की ओर)
दर्रा                   ऊंचाई             स्तिथि
थाल घाट           580 मी.      नासिक के मुंबई के बीच का संपर्क मार्ग
भोर घाट            630 मी.    मुंबई एवं पुणे के बीच का संपर्क मार्ग
पाल घाट           305 मी.      कोयंबटूर एवं कोचीन के बीच का संपर्क मार्ग
शेनकोटा           280 मी.     तिरुअनंतपुरम एवं मदुरै के बीच का संपर्क मार्ग
दक्कन का पठार महाराष्ट्र राज्य में है l  यह ज्वालामुखीय बेसाल्ट चट्टानों का बना है l  यह काली मिट्टी का क्षेत्र है l इस पठार के पूर्व भाग को विदर्भ कहा जाता है l
धारवाड़ का पठार कर्नाटक राज्य में है यह परिवर्तित चट्टानों से बना है  पठार के पश्चिमी भाग में बाबा बुदन की पहाड़ी तथा ब्रह्मगिरी की पहाड़ी है l
नीलगिरी की पहाड़ी तमिलनाडु में है जो एक ब्लॉक पर्वत है l  यह मुख्यतः चारनोकाईट पठार से बनी है l
इसकी सबसे ऊंची चोटी डोडाबेट्टा  (2,637 मीटर) है, जो दक्षिण भारत की दूसरी सबसे ऊंची चोटी है l उटकमंड इसी पहाड़ी पर है l
तमिलनाडु राज्य में नीलगिरी के दक्षिण भाग में पालघाट हैं l पालघाट गैप (Pal ghat gap) पश्चिम एवं पूर्वी घाट का मिलन स्थल है l  अर्थात पूर्वी घाट एवं पश्चिमी घाट के मिलन स्थल पर नीलगिरी पहाड़ी स्थित है l इसके पार फैली कार्डामम की पहाड़ियां पश्चिमी घाट का विस्तार मानी जाती है l
अन्नामलाई की पहाड़ी पर स्थित दक्षिण भारत की सबसे ऊंची चोटी अनैमुदी की ऊंचाई (2,696 मीटर) है l
नोट:  अनैमुदी तीन  पहाड़ियों का केंद्र बिंदु है l  यहां से तीन पहाड़ी श्रंखलाएं तीन दिशाओं में  जाती है l दक्षिण की ओर इलायची (कार्डामम) की पहाड़ियां, उत्तर की और अन्नामलाई की पहाड़ियां तथा उत्तर पूर्व की ओर पालने की पहाड़ियां है प्रसिद्ध पर्यटक स्थल कोडाईकनाल पालनी पहाड़ी में ही स्थित है यह तमिलनाडु में स्थित है l
आंध्रप्रदेश और ओडिशा के तटीय भाग में महेंद्रगिरी की पहाड़ी हैं l  
भारत के पूर्वी समुद्री तट को निम्न भागों में बांटा गया है -
1. कन्याकुमारी से कृष्णा डेल्टा तक का तट कोरोमंडल तट,
2. कृष्णा डेल्टा से गोदावरी डेल्टा तक का तट गोलकुंडा तट एवं
3.  गोदावरी डेल्टा से लेकर उत्तरी भाग उत्तरी सरकार तट कहलाता है l
भारत के पूर्वी तट पर स्थित प्रमुख बंदरगाह है- पारादीप ( ओडिशा), कोलकाता ( पश्चिम बंगाल), विशाखापट्टनम ( आंध्र प्रदेश), चेन्नई, तूतीकोरिन  एवं एन्नोर (तमिलनाडु)
विशाखापट्टनम बंदरगाह डॉलफिन नोज पहाड़ी के पीछे सुरक्षित है l
पूर्वी तट पर स्थित प्रमुख  लैगून है : पुलीकट ( चेन्नई), चिल्का (पुरी) तथा  कोलेरू (आंध्र प्रदेश)
नोट:  लैगून :   समुद्र क्षेत्र में तटीय क्षेत्र का पानी स्थल भाग में घुस जाता है और धीरे-धीरे  बालू का अवरोध खड़ा कर देने पर स्थलीय क्षेत्र का जलीय भाग समुद्र से अलग हो जाता है  इसी जलीय आकृति को लैगून कहते हैं l
भारत के पश्चिमी तट को निम्न भागों में बांटा गया है-  1. गुजरात से गोवा तक का तटीय क्षेत्र कोंकण तट 2. गोवा से कर्नाटक के  मंगलुरु तक का तटीय क्षेत्र केनरा तट तथा 3. मंगलुरु से कन्याकुमारी तक का तटीय क्षेत्र मालाबार तट कहलाता है l
भारत के पश्चिमी तट पर स्थित प्रमुख बंदरगाह है- कांडला (गुजरात), मुंबई( महाराष्ट्र), मार्मागोवा( गोवा),  मंगलुरु(कर्नाटक), कोच्चि( केरल), न्हावाशोवा (महाराष्ट्र) l
मालाबार तट पर अनेक पश्चजल है जिसे स्थानीय भाषा में कयाल (kayal) कहते हैं l
भारत में द्वीप समूह है- 1. अंडमान निकोबार द्वीपसमूह 2. लक्षद्वीप द्वीप समूह l
अंडमान निकोबार  द्वीप समूह बंगाल की खाड़ी में स्थित है जो क्षेत्रफल की दृष्टि से सबसे बड़ा केंद्र शासित प्रदेश हैं l  इसमें करीब 247 छोटे-छोटे द्वीप हैं l निकोबार में द्वीप है l यह द्वीप वास्तव में समुद्र में डूबे हुए पर्वत के शिखर है l  लैंडफॉल द्वीप अंडमान निकोबार द्वीप समूह का सबसे उत्तरी द्वीप है l कोको जलमार्ग इसे म्यांमार के कोको द्वीप से अलग करता है, जहां चीन ने निगरानी तंत्र लगाया हुआ है l
बंगाल की खाड़ी में नदियों ने जलोढ़ मिट्टी के निक्षेप द्वारा कई  द्वीपों का निर्माण किया है l हुगली के निकट 20 किमी लंबा सागरद्वीप है, जिसे गंगासागर के नाम से जाना जाता है l  यहां न्यू मूर नामक द्वीप का निर्माण हाल ही में हुआ है l

                                                   प्रमुख जल अंतराल
नाम                                      अवस्थिति
8°  चैनल                 मालदीव व मिनीकॉय के मध्य
9°  चैनल                 लक्ष्यद्वीप व मिनिकॉय के मध्य
10°  चैनल                छोटा अंडमान और कार निकोबार के मध्य
ग्रैंड चैनल                 सुमात्रा ( इंडोनेशिया) व निकोबार के मध्य
पाक  स्ट्रेट                  तमिलनाडु व श्रीलंका के मध्य
डंकन पास                दक्षिण अंडमान व लघु अंडमान के मध्य
कोको स्ट्रेट               कोको द्वीप ( म्यांमार) व उत्तरी अंडमान के मध्य
पाक खाड़ी                तमिलनाडु व श्रीलंका के मध्य
मन्नार खाड़ी              द. पू. तमिलनाडु व श्रीलंका के मध्य
लक्षद्वीप सागर             लक्षद्वीप सागर व मालाबार तट के मध्य
नोट:  सेतुसमुद्रम  परियोजना मन्नार की खाड़ी को पाक खाड़ी से जोड़ती है l

अंडमान निकोबार द्वीप समूह की सबसे ऊंची पर्वत चोटी सैडल पीक ( 730 मीटर) है l
माउंट हैरियट दक्षिण अंडमान में तथा माउंटथुलियर निकोबार द्वीप समूह में स्थित है l
केंद्र शासित प्रदेश का सबसे बड़ा पतन (बंदरगाह) पोर्ट ब्लेयर दक्षिणी अंडमान है l
नेल्लोर के निकट श्रीहरिकोटा प्रवाल निर्मित द्वीप है l  पुलिकट झील इसे द्वीप द्वारा समुद्र से विलग है l
लक्षद्वीप द्वीपसमूह अरब सागर में स्थित है l  इसमें कुल 36 द्वीप है l इसमें केवल 10 द्वीप पर ही आबादी है l  ऑनड्रेट लक्षद्वीप का सबसे बड़ा द्वीप है l पिटली द्वीप, जहां मनुष्य का निवास नहीं है, वहां एक पक्षी अभयारण्य है l
पम्बन द्वीप मन्नार की खाड़ी में स्थित है l
भारत में बैरन तथा नारकोंडा नामक दो प्रसिद्ध ज्वालामुखी द्वीप है l
बैरन द्वीप ( अंडमान तथा निकोबार द्वीप समूह में)  एक सक्रिय ज्वालामुखी है, जबकि नारकोंडम दो सुषुप्त ज्वालामुखी है l

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